कोलकाता, हावड़ा, हुगली और आसपास के इलाकों में 27 फरवरी 2026 शुक्रवार दोपहर करीब 1:22 बजे जोरदार झटके महसूस हुए. लोग घरों, दफ्तरों और स्कूलों से बाहर भागे. कई जगहों पर 10-15 सेकंड तक कंपकंपी महसूस की गई. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) और EMSC के मुताबिक इसकी तीव्रता 5.5 थी. USGS ने 5.3 बताया है.
एपिसेंटर कहां था?
भूकंप का केंद्र पश्चिम बंगाल के ताकी से 26 किमी दक्षिण-पूर्व में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के पास था. गहराई बहुत कम – सिर्फ 9.8 किमी थी. इसी वजह से कोलकाता में झटके इतने तेज महसूस हुए. अभी तक कोई जान-माल का नुकसान या बड़ी क्षति की खबर नहीं है. लोग घबराए जरूर हैं, लेकिन यह मध्यम तीव्रता का भूकंप था.
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कोलकाता में इससे पहले कब आया था भूकंप?
कोलकाता खुद में बड़े भूकंप बहुत कम आते हैं क्योंकि यह सीस्मिक जोन-III (मध्यम खतरा) में है. ज्यादातर झटके पड़ोसी इलाकों से महसूस होते हैं.
- पिछला बड़ा झटका: 21 नवंबर 2025 को बांग्लादेश के ढाका के पास 5.7 तीव्रता का भूकंप आया था. कोलकाता में तेज कंपन महसूस हुए थे.
- 3 फरवरी 2026: म्यांमार में 6.0-6.1 तीव्रता का भूकंप – कोलकाता में फिर झटके आए.
- पुराने: 1921 में बंगाल की खाड़ी में 6.4 तीव्रता का भूकंप आया था. 1897 का महान असम भूकंप (8.1) कोलकाता तक महसूस हुआ था।.
- सबसे पुराना चर्चित: 1737 का ग्रेट कलकत्ता अर्थक्वेक. कोलकाता में बड़े भूकंप बहुत दुर्लभ हैं, लेकिन पड़ोसी क्षेत्रों से झटके अक्सर आते रहते हैं.
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भूकंप कितने प्रकार के होते हैं?
भूकंप मुख्य रूप से कारण के आधार पर 5 प्रकार के होते हैं…
- टेक्टॉनिक भूकंप (90% भूकंप इसी प्रकार के)… पृथ्वी की प्लेट्स (टेक्टॉनिक प्लेट्स) एक-दूसरे से टकराती, रगड़ती या अलग होती हैं. हिमालय क्षेत्र में यही सबसे ज्यादा होते हैं.
- ज्वालामुखी भूकंप… ज्वालामुखी फटने से पहले या बाद में आते हैं.
- सिकुड़ने/ढहने वाला भूकंप… खदान, गुफा या भूमिगत खोखले हिस्से ढहने से.
- इंड्यूस्ड भूकंप… इंसान की गतिविधियों से – बड़े बांध, तेल-गैस निकालना, फ्रैकिंग आदि.
- विस्फोटक भूकंप… परमाणु परीक्षण या बड़े बम विस्फोट से.

गहराई के आधार पर 3 प्रकार…
- उथले (Shallow) – 0 से 70 किमी गहराई.
- मध्यम (Intermediate) – 70 से 300 किमी.
- गहरे (Deep) – 300 किमी से ज्यादा.
क्या कम गहराई के भूकंप ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं?
उथले भूकंप की ऊर्जा पृथ्वी की सतह तक कम दूरी तय करती है, इसलिए खतरनाक होती है. कंपन ज्यादा तेज और ज्यादा देर तक महसूस होता है. आज का 5.5 तीव्रता वाला भूकंप सिर्फ 9.8 किमी गहरा था, इसलिए कोलकाता में इतना जोरदार लगा.
गहरे भूकंप की ऊर्जा रास्ते में ही चट्टानों में सोख ली जाती है, इसलिए सतह पर कम असर पड़ता है. 5.5 तीव्रता का उथला भूकंप ज्यादा नुकसान कर सकता है, जबकि 7.0 तीव्रता का गहरा भूकंप कम.
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कोलकाता सुरक्षित है या नहीं?
कोलकाता जोन-III में है, यानी मध्यम खतरा. लेकिन आसपास बांग्लादेश, नेपाल, असम जैसे सक्रिय क्षेत्र हैं. पुरानी इमारतें, गगनचुंबी इमारतें और भीड़-भाड़ वाला शहर होने से सावधानी जरूरी है.
भूकंप की भविष्यवाणी अभी नहीं हो सकती, लेकिन तैयार रहना बहुत जरूरी है. आज का भूकंप कोई बड़ा नहीं था, लेकिन याद दिलाता है कि प्रकृति से सावधान रहना चाहिए.
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